• अंतिम अपडेट:Friday 23 June 2017, 10:35:46 IST

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आईसीआईसीआई रूरल समिट -‘सशक्त गांव, समृद्ध भारत‘ का केन्द्रीय वित्त, रक्षा एवं कॉरपोरेट मामलात के मंत्री अरूण जेटली उद्घाटन करते हुए
आईसीआईसीआई रूरल समिट -‘सशक्त गांव, समृद्ध भारत‘ का केन्द्रीय वित्त, रक्षा एवं कॉरपोरेट मामलात के मंत्री अरूण जेटली उद्घाटन करते हुए

नई दिल्ली, 02 मई 2017 (ऑनलाइन न्यूज़ इंडिया): आईसीआईसीआई समूह ने आज नई दिल्ली में आयोजित समारोह में 100 ‘आईसीआईसीआई डिजीटल विलेजेस‘ ग्रामीण भारत को और अधिक सशक्त बनाने के प्रयास के तहत राष्ट्र को समर्पित किए। इस अवसर पर

आयोजित ‘आईसीआईसीआई रूरल समिट -‘सशक्त गांव, समृद्ध भारत‘ का केन्द्रीय वित्त, रक्षा एवं कॉरपोरेट मामलात के मंत्री अरूण जेटली ने उद्घाटन किया।

इन डिजीटल गांवों का उद्घाटन बैंक द्वारा नवम्बर, 2016 को किए गए अपने संकल्प के तहत किया गया जिसमें 100 गांवों को डिजीलीकृत करने को वादा किया गया था। इस कार्यक्रम में शुरू से अंत तक के लेनदेन तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का डिजीटलाइजेशन करना, ग्रामीणों को इसके लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना, उनकी ऋण सुविधा का विस्तार करना तथा ग्रामीणों की पहुंच बाजार तक बना कर उनके लिए स्थाई आजीविका के संसाधन उपलब्ध करवाना है।

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में आईसीआईसीआई बैंक की प्रबन्ध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर ने कहा ‘‘आईसीआईसीआई ग्रुप का हमेशा से यह मानना रहा है कि किसी भी राष्ट्र की नींव उसके गांवों के समृद्ध होने से और मजबूत होती है। इसी क्रम में हमारा नजरिया ‘सशक्त गांव, समृद्ध भारत‘ रखा गया, जिसके तहत हमने पूरे देश के 100 गावों का 100 दिनों के भीतर कायाकल्प किया।

हमने इन गांवों में न्यूनतम नकदी रहित पारिस्थितिकी तन्त्र विकसित किया, इसके अतिरिक्त इन गांवों के 11,300 ग्रामीणों को जिनमें 7500 से अधिक महिलाएं थी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया तथा उन्हें क्रेडिट लिंकेज प्रदान की। हमने यह सारा काम महज 100 दिन की अवधि के भीतर पूरा कर दिखाया।

यह हमारे लिए अति सम्मान का विषय है कि हमारे माननीय केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली ने आज यहां आईसीआईसीआई रूरल समिट का उद्घाटन किया। हमारा लक्ष्य इस प्रकार की पहलों से यह प्रदर्शित करना है कि टेक्नोलॉजी और कौशल का उपयोग कर भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अन्तर को समाप्त करना है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस विशाल परियोजना से हम माननीय प्रधानमंत्री के ‘डिजीटल इण्डिया‘ और ‘मेक इन इण्डिया‘ दोनो के ही दृष्टिकोण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे। हमारा इरादा इस प्रकार के गांवों की संख्या का दिसम्बर, 2017 तक विस्तार कर अन्य 500 गांवों को और इनमें शामिल करना है। इस प्रक्रिया से हम अतिरिक्त  50,000 और व्यक्तियों को प्रशिक्षित करेंगे जिसका प्रभाव 12.5 लाख जिन्दगियों पर पड़ेगा। ‘‘

यह 100 विशेष गांव देश में चारों तरफ है, इन गांवों के रहने वाले अब बैंकिंग और भुगतान लेनदेन के लिए डिजीटल चैनल्स का उपयोग कर सकेंगे। वे अपने आधार कार्ड -आधारित ई-केवाइसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) के माध्यम से बैंक में खाते खोल सकेंगे, सभी खुदरा स्टोर्स पर पाइन्ट-ऑफ-सेल (पीओएस) मशीनों और एसएमए आधारित मोबाइल समाधानों के माध्यम से नकदी रहित भुगतान कर सकेंगे। इस सुविधा के जरिए ग्रामीण अपने घर के दरवाजे पर ही नकदी की जमा व निकासी कर सकंेगे। ग्रामीण डेयरी कॉपरेटिव इकाइयों का भी डिजीटाइजेशन किया गया है ताकि वह अपने सदस्यों को उनके बैंक खातों में डिजीटल माध्यम से सीधा भुगतान कर सकें।

इसके अलावा, आईसीआईसीआई बैंक ने आईसीआईसीआई फाउण्डेशन फॉर इनकलुिसव ग्रोथ (आईसीआईसीआई फाउण्डेशन) जो कि आईसीआईसीआई की कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) इकाई है, की सहभागिता में ग्रामीणों को निःशुल्क व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया जिसमें महिला प्रशिक्षण पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित रखा गया। आज की तारीख में 7500 महिलाओं सहित कुल 11,300 ग्रामीणों को इस प्रकार का प्रशिक्षण विगत 100 दिनों के भीतर दिया जा चुका है ताकि उनकी स्थाई आजीविका में मदद मिल सके। बैंक ने साख-विश्वसनीयता वाले प्रशिक्षित ग्रामीणों के लिए अपनी ऋण सुविधा में भी विस्तार किया है ताकि उनको अपने गांवों में ही स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। इस कार्यक्रम का सकारात्मक प्रभाव रहा है, और इससे इन गांवों के करीब  2.5 लाख लोग लाभान्वित हो सकेंगे।

इन 100 गांवों को डिजीटल गांवों के रूप में बदलने की प्रेरणा माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजीटल ग्रामीण विस्तार दृष्टिकोण से प्रेरित है। जनवरी 2015 में मोदी ने गुजरात के साबरकांठा जिले के आकोदरा गांव को पहले ‘आईसीआईसीआई डिजीटल विलेज‘ के रूप में आईसीआईसीआई समूह के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में राष्ट्र को समर्पित किया था।

जिन 100 गांवों को ‘आईसीआईसीआई डिजीटल विलेज‘ के रूप में बदला गया है वे पूरे भारत के 17 राज्यों में है। इनमें गुजरात में 16, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश प्रत्येक में 14, तमिलनाडु और कर्नाटक में क्रमशः 12 तथा राजस्थान में 11 तथा शेष अन्य हैं।

‘आईसीआईसीआई डिजीटल विलेज‘ की पहल तीन आयामों में है। इनका पहला आयाम बाधारहित एवं डिजीटल बैंकिंग की पहुंच को बढ़ाना है वे हैं:

आईसीआईसीआई बैंक आधार-बेस्ड ई-केवाईसी का उपयोग कर रहा है ताकि ग्रामीणों को कागज रहित आधार पर बैंक में अपने खाते खोलने में मदद मिल सके, इसके लिए उन्हें भौतिक दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। इन बचत खातों को आधार कार्ड से जोड़ा गया है ताकि इन खातों को मिलने वाले शासकीय लाभ सीधे उनके खातों में जमा हो सकें। यह समर्पित आईसीआईसीआई की शाखा हर गांव इन खातों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं।

बैंक ने एसएमएस आधारित मोबाइल सेवा भी प्रदान की है, जिसमें ग्रामीण अपना पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा के साथ ही वे एसएमएस अलर्ट और मिनी स्टेटमेंट प्राप्त कर सकेंगे तथा यह सुविधा बेसिक मोबाइल फोन्स पर भी उपलब्ध होगी। यह सेवा 10 क्षेत्रीय भाषाओं असमिया, बंगाली, गुजराती, हिन्दी, कन्नड, मराठी, ओडिया, पंजाबी, तमिल और तेलुगू में उपलब्ध होंगी। बैंक ने पीओएस मशीन्स भी स्थापित की हैं, जिससे गांवों के खुदरा कारोबारी जिनमें व्यापारी, राशन की दुकानें तथा ग्रामीण सहकारी समितियां शामिल है ताकि वे डिजीटल भुगतान स्वीकार कर सकें। बैंक ने इन गांवों में अपने बिजनेस कॉरपोण्डेन्ट्स को भी डिजीटल उपकरणों यथा माइक्रो-एटीएम्स जीपीआरए सुविधा से युक्त किया है। इस सुविधा से ग्रामीण अपनी नकदी की जमा और निकासी अपने रूपे डेबिट कार्ड अथवा आधार बेस्ड बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के साथ कर सकेंगे। इन गांवों में 260 से भी अधिक पीओएस और माइक्रो-एटीएम्स लगाए जा चुके हैं।

इसके अतिरिक्त बैंक ने ग्रामीण दुग्ध सहकारी समितियों  और इनके सदस्यों को दूध की बिक्री एवं खरीद के लिए नकदी रहित भुगतान समाधान भी तैयार किया है। यह कई गांवों में उपलब्ध है, इसकी वजह से सदस्य अपने खातों में सीधे ही पैसा प्राप्त करने में सक्षम हो गए हैं।

इस पहल का दूसरा आयाम ग्रामीणों को अपनी आजीविका के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना है। और इसके लिए निम्नांकित कदम उठाए गए हैंः

आईसीआईसीआई फाउण्डेशन ने अपने ‘आईसीआईसीआई एकेडमी फॉर स्किल -रूरल इनिशिएटिव‘ के माध्यम से इन गांवों के ग्रामीणों को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। इसके लिए इन गांवों का रहने वाला कोई भी व्यक्ति निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त करने का पात्र होगा। यह कौशल प्रशिक्षण के तहत विषयों की बड़ी श्रंखला है, जो कि ग्राम विशिष्ट के आस-पास की अर्थ व्यवस्था पर आधारित है।

इन विषयों की सूची में समग्र कृषि, डेयरी एवं वर्मीकम्पोस्टिंग, कृषि उपकरण की देखभाल एवं मरम्मत, डेªेस डिजाइनिंग, और सेण्ड स्टोन कटिंग, मोबाइल फोन सर्विसिंग और घरेलू विद्युत उकरणों की मरम्मत शामिल हैं। इन प्रशिक्षणों की अवधि 15 से 30 दिन रखी गई है।

इस पहल का तीसरा आयाम ग्रामीणों के अपनी आजीविका के विशाल अवसर प्रदान करने के लिए उन्हें क्रेडिट लिंकेज प्रदान करना है। इसके प्रमुख तत्व इस प्रकार हैं:

आईसीआईसीआई बैंक ग्रामीणों को स्वयं सहायता समूहों (सेल्फ हैल्प ग्रुप्स)  और संयुक्त जवाबदेही समूहों (ज्वाइंट लायबिलीटजी ग्रुप्स) के माध्यम से सुविधा प्रदान करवाता है और सदस्यों को ऋणों की पेशकश प्रदान करता है। आईसीआईसीआई बैंक ने साख विश्वसनीयता वाले ग्रामीणो के लिए ऋण सुविधा का विस्तार किया है जो उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड्स, गोल्ड लोन्स और कृषि उपकरणों सहित अन्य के रूप में प्रदान किए जाते हैं। बैंक यह ऋण ग्रामीणो को उनके दरवाजे पर टेबलेट डिवाइसेज और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उपलब्ध करवाता है ताकि उनका कीमती समय बच सके और उन्हें अपने बैंक की नोडल शाखा तक इसके लिए नहीं आना पड़े।

बैंक और आईसीआईसीआई फाउण्डेशन ग्रामीणों को उनके उत्पाद अपने मार्केट लिंकेज के माध्यम से बेचने में भी मदद करते हैं, यह लिंकेज स्थानीय अथवा इसके आस-पास के क्षेत्रों में हैं।

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